Taking a stand for your passions is not easy. Despite that, there are people who do not bow down in front of what life brought their way and instead pursue their passions relentlessly. This poem is dedicated to all such people 🙂

 

बढ़ती गयी एक तितली फूलों की तलाश में,
दौड़ती उसकी आंखें धरती और आकाश में ।
इतनी लम्बी उड़ान बिना मंज़िल का पता लिये
तितली के पंखों को फ़ीका करती रही ।

रास्ते भर सोचे कि फूलों से ये कहूँगी,
जब सामने आयॆंगे तो ऐसे कुछ हँसूंगी ।
अपने पंखों से उनकी पंखुड़ियाँ मिलाऊँगी
और पूछूँगी मेरा रास्ता इतना कठिन क्यूँ रखा ?

यही सोच बढ़ी तितली फूलों की तलाश में,
चहचहाती नज़रें धरती और आकाश में ।

फूलों के अब कई सावन आके चले गये,
तितली के पंखों के रंग धुँधलाते चले गये ।
खुद को समझाये कि जब फूलों से मिल जायेगी
हर रास्ते की अड़चन बस एक याद बन जाएगी

रुकते बढ़ते पहुंची तितली उन फूलों के पास में,
जिनकी राह बाटी थी उसने इतनी आस में
जिनके लिए उड़ते-उड़ते उसके पंख बदरंग हो गए
आज तितली के सामने वहीं फूल खिल रहे थे,
पर उसके पंख आज आगे नहीं बढ़ रहे थे

वो ना थमना चाहती थी, ना रुकना चाहती थी,
तो मुड़ कर फिर उड़ी तितली वापस एक तलाश में,
उसको भरनी थी और उड़ाने धरती और आकाश में

क्योंकि कुछ तितलियों की मंजिल फूल तक नहीं होती
क्योंकि कुछ तितलियों की पहचान पंखों के रंग तक नहीं होती
उड़ती है कुछ तितलियाँ राहों की खुशबू के लिए
और खोलती है पंख बस नजारों से गुफ्तगू के लिए ।

तो अब रोज निकलती है तितली नई उड़ानों की तलाश में,
और निहारने नए नजारे धरती और आकाश में

 

Copyright © Neha Sharma

 

Advertisements