कलम is the Hindi word for a pen. This poem is about my state of mind as I constantly look around for stories and yet when I write something, I don’t know how it came about. It’s almost as if the pen and paper had a mind of their own 🙂

ये रास्ते की खूबी है या मंज़िल की चाहतें
हर झपकती पलक अब अपनी कहानी सुनाती है ।
मैं बैठती हूँ जोहने जब बाट एक पहचान की
हर गुज़रती हवा मुझे गुमराह बोल जाती है ।

अब तक कभी मौका नहीं मिला बैठ कुछ बुनने का
कलम खुद ही हर तरफ़ से किस्से ढूँढ लाती है ।
मैं होती हूँ ख्याल में अपने किसी भी काम के
उंगली पकड़के खींच मुझे कागज़ एक थमाती है ।

ये रास्ते की खूबी है या मंज़िल की चाहतें
हर झपकती पलक अब अपनी कहानी सुनाती है ।

पानी की बूँद से उसका सफर सुनके आती है
तारों की रोशनी से उनकी यादें टटोलके लाती है ।
मैं देख रही होती हूँ बस नीले आसमान को
इतनी देर में ये बादलों की जंग समझ आती है ।

मैं कलम से क्या ही लिखूंगी, कलम लिखती है मुझे
और भेद जब खुलता है, ये कागज़ों में छिप जाती है ।
हर कोई यही सोचता है कि मैं कलम से लिखती हूँ
पर हक़ीकत में हर पल मुझे कलम लिखती जाती है ।

ये रास्ते की खूबी है या मंज़िल की चाहतें
हर झपकती पलक अब अपनी कहानी सुनाती है ।

 

Copyright © Neha Sharma

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